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अनुज कन्नौजिया के गांव से रिपोर्ट, पत्नी बोली- मेरे ऊपर 4 की जिम्मेदारी, नहीं तो मैं खुद बदला लेने के लिए सक्षम

ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, मऊ. मैं अपने दोनों बच्चों और माता-पिता के साथ झारखंड जा रही थीं। हम लोग वहीं शिफ्ट हो रहे थे। अनुज वहां पर पहले से थे। लेकिन हमारे जाने से 2 दिन पहले ही यूपी STF और झारखंड पुलिस ने अनुज को मार दिया। मेरे छोटे-छोटे बच्चों के सिर से बाप का साया उठ गया। मेरे ऊपर चार लोगों की जिम्मेदारी है, वरना मैं खुद बदला लेने के लिए सक्षम हूं। ये कहना है अनुज कन्नौजिया की पत्नी रीना राय (34) का।
अनुज कन्नौजिया जो एनकाउंटर में मारा गया।
14 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि
अनुज कन्नौजिया (36), जिसका 29 मार्च को झारखंड में एनकाउंटर हो गया। अनुज मुख्तार अंसारी गैंग का शूटर था। अनुज का अंतिम संस्कार 31 मार्च को गाजीपुर में किया गया। उसके 14 साल के बेटे ने उसको मुखाग्नि दी। अनुज की मौत होने के बाद परिवार के लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है, वो सुधर रहा था फिर उसको क्यों मारा। वहीं यूपी STF के मुताबिक, अनुज किसी बड़े कांड को अंजाम देने वाला था।

पढ़िए अनुज के गांव से रिपोर्ट-
अनुज की पत्नी गांव में रहती है लेकिन अपने एक रिश्तेदार के साथ। वो कुछ दिन पहले ही गांव आई है। बड़ा भाई विनोद (40) और उसकी पत्नी शशिप्रभा (36) गांव में ही अलग घर में रहते हैं। अनुज के मां-बाप अलग घर में रहते हैं। भाई की मौत के बाद अनुज की बड़ी बहन शोभा देवी गांव आई हुई है। जमशेदपुर में अनुज बड़ी बहन के घर के पास ही किराए पर रहता था। उसका परिवार साथ में रहता था।

सबसे पहले पढ़िए...अनुज की पत्नी की बात-
अनुज की पत्नी ने कैमरे पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया। उसने कहा, मैं अपनी पूरी बात कहूंगी लेकिन कैमरे पर नहीं। फोन बंद करने के बाद उसने बताया, हम और अनुज काफी समय से नहीं मिले थे। अब वो ये सब काम खत्म कर रहे थे। झारखंड में ही बसने वाले थे। लेकिन पुलिसवालों ने तो हमारा घर उजाड़ दिया।
मेरे पति के ऊपर 4 मर्डर के केस किए, जबकि उन्होंने बस 3 लोगों की हत्या की है। जिनको मारा है, वो उनके परिवार को परेशान कर रहे थे। मुझे भी रंगदारी के मामले में जेल भेजा। यहां गांव में भी परिवार के लोगों के घर तोड़ दिए। मेरे पति की वजह से घर वालों को क्यों परेशान किया गया? मेरे बच्चे अभी छोटे हैं, बड़े होने पर इनको भी परेशान किया जाएगा, तब हम लोग क्या करेंगे? मुझे बस यही कहना है, अब हम लोगों को माफ कर दिया जाए।

मेरे पति की साल 2009 के बाद से मुख्तार अंसारी से नहीं बनती थी

पुलिस मेरे पति को गलत तरीके से फर्जी मुकदमा दर्ज कर हिस्ट्रीशीटर तैयार करने में जुट गई। उन्होंने मुख्तार अंसारी के साथ कभी काम नहीं किया था। हां संपर्क में जरूर थे लेकिन मुख्तार के कहने पर कोई काम नहीं किया। काम करने से मना करने पर उनकी साल 2009 के बाद से मुख्तार अंसारी से नहीं बनती थी।

जमशेदपुर में रहकर वो अपने जीजा के साथ काम पर ध्यान दे रहे थे। हमने कभी यह नहीं सोचा था कि इतना सुधार करने के बाद भी ऐसा हो जाएगा। जमशेदपुर में अनुज जहां रहते थे, वह जगह बहुत सुरक्षित थी। लेकिन किसी की मुखबिरी से उनको मारने के लिए 30 गाड़ियों से पुलिस पहुंची और मार दिया।

एनकाउंटर वाली सुबह 10 बजे हमारी आखिरी बार बात हुई थी। उन्होंने हर बार की तरह आराम से बात किया। फिर उसी रात यह सब हो गया। मैं हमेशा उनसे फोन बंद रखने के लिए कहा करती थी, लेकिन केवल मुझसे बात करने के लिए वो अपना मोबाइल ऑन करते थे। बात करने के बाद कर के बंद कर देते थे।

मेरे ऊपर चार लोगों की जिम्मेदारी है, वरना मैं खुद बदला लेने के लिए सक्षम हूं। मैं अपने दोनों बेटों और माता-पिता के लिए नई शुरुआत करने की सोच रही हूं। हम यहां से जमशेदपुर चले जाएंगे। वहीं रहेंगे। मेरे बच्चे वहीं पढ़ेंगे।

पत्नी से बात करने के बाद हम लोग अनुज के घर पहुंचे। अनुज का परिवार बहुत गरीब है। घर के नाम पर बस ईंटों का एक ढांचा खड़ा हुआ है। वो भी कई जगह से टूट चुका है। गेट की जगह एक पीले रंग का कपड़ा बंधा हुआ है। उसी से पूरे घर को छिपाया गया है। घर के अंदर दो बेड पड़े हैं।
अनुज के मां-बाप इसी घर में रहते हैं।
थोड़ी दूरी पर जमीन पर किचन का सामान रखा है। वहीं पर गैस रखी हुई है। नहाने के लिए बाहर जाना पड़ता है। ईंटों का एक कमरा जैसा बना है, जिसमें अनुज के बूढ़े मां-बाप रहते हैं। पिता सरकारी टीचर थे। उनकी जो पेंशन आती है, घर का खर्चा उसे ही निकलता है। अनुज का अंतिम संस्कार करके परिवार के लोग गांव लौट आए हैं। अनुज का बड़ा बेटा अपनी दादी को रोने पर संभाल लेता है। उनको चुप कराने लगता है।

घर के बाहर ही बड़ी बहन शोभा देवी बैठी हुई थी। भाई का नाम सुनते ही वो रोने लगी। उन्होंने बताया, अनुज को बचपन से मैंने अपनी गोद में खिलाया था। मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि उन्हीं हाथों से उसको कफन ओढ़ाना पड़ेगा। अनुज जमशेदपुर में हमारे घर के पास ही रहता था। उसने गलत रास्ता छोड़ दिया था। फिर भी उसको मार दिया।
दादी को संभालता अनुज का बड़ा बेटा।
बेटे की मौत से दुखी मां सुशीला देवी ने बताया, मेरा बेटा पढ़ा लिखा था। वो कभी किसी से झगड़ा नहीं। केवल उसकी बगल वाले गांव के ठाकुरों से नहीं बनती थी। बड़े बेटे मनोज से झगड़ा होने के साथ ये सब शुरू हुआ था। धीरे-धीरे बात बिगड़ती चली गई। मेरा तो पूरा परिवार टूट गया है। मुख्तार के साथ मेरे बेटे का गलत तरीके से नाम जोड़ा गया। अगर ऐसा होता, तो आज हम लोग भी अच्छे घर में रह रहे होते। ऐसे टूटे घर में जिंदगी नहीं काट रहे होते।

देवर अनुज की वजह से हमारा मकान साल 2023 में गिरा दिया गया- भाभी
अनुज के घर से 500 मीटर दूर बड़े भाई विनोद का घर है। विनोद (40) बीमार हैं। अनुज की भाभी ही काम करके घर चलाती हैं। भाभी शशि प्रभा देवी ने बताया, 17 साल की कच्ची उर्म में अनुज घर छोड़कर चला गया और फिर कभी घर लौटकर नहीं आया। सब लोग कहते हैं कि अनुज ने गलत किया, लेकिन यह बात कोई नहीं जानता है कि अनुज के परिवार वालों को कितनी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
अनुज की भाभी।
देवर अनुज की वजह से हमारा मकान साल 2023 में गिरा दिया गया। मेरे पति राज मिस्त्री का काम करके मेहनत और पसीने की कमाई से घर बनवाए थे। हमारा परिवार बहुत गरीब है। पैसों की तंगी होने की वजह से मेरे पति का सही से उपचार नहीं हो पा रहा है। यह सब भाई की हत्या का बदला लेने से शुरू हुआ था। पता नहीं अनुज की मौत के साथ खत्म होगा कि नहीं।
 
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