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पूर्व जेल अधीक्षक उमेश सिंह लैंगिक भेदभाव के दोषी, संयुक्त सचिव ने अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की

ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, वाराणसी. वाराणसी जिला जेल के जेल अधीक्षक रहे उमेश सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके ऊपर पूर्व डिप्टी जेलर रतन प्रिया द्वारा लगाए गए लैंगिक भेदभाव और अन्य आरोपों को जांच में सही पाया गया है।
इस मामले की जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर पर उनके ऊपर अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। इसके बाद उन्हें दंडित किया जाएगा।

बता दें की हाल ही में पूर्व डिप्टी जेलर मीना कन्नौजिया ने भी उमेश सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उस मामले में भी जांच होना अभी बाकि है। वहीं मीना कन्नौजिया पर लगे दुष्कर्म के आरोपी को अस्पताल में भर्ती करने के मामले में भी जांच होगी।

शासन से जारी आदेश के अनुसार मैनपुरी जिला जेल में इस समय डिप्टी जेलर के पद पर तैनात रतन प्रिया ने जुलाई 2024 में एक शिकायती पत्र कारागार प्रशासन को भेजा था।

जिसमें तत्कालीन वाराणसी जिला जेल के अधीक्षक उमेश सिंह पर कारागार में कपड़ों को अस्त-व्यस्त रखना।

उसी अवस्था में महिला कार्मिकों से अमर्यादित भाषा में बात करना, लैंगिक भेदभाव करना, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करना, शालीन ढंग से न बैठना आदि आरोप लगाए थे।

आंतरिक शिकायत समिति ने की जांच
संयुक्त सचिव शिव गोपाल सिंह द्वारा जारी लेटर के अनुसार- इस प्रकरण में आंतरिक जांच समिति बनाई गई थी। जिसने अपनी रिपोर्ट 22 मार्च को कार्यालय में जमा किया है।
इस जांच रिपोर्ट के आधार पर और अन्य महिला डिप्टी जेलरों से इस प्रकरण में बात करने के बाद यह बात सामने आयी कि उमेश सिंह महिला डिप्टी जेलरों के साथ मर्यादित भाषा का प्रयोग करते हैं और उनसे लैंगिक भेदभाव रखते हैं।

डिप्टी जेलर को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर शिव गोपाल सिंह, संयुक्त सचिव कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-1 द्वारा उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के नियम-7 के अंतर्गत अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की है। इसमें जांच के बाद उन्हें दंडित किया जाएगा।
 
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