बनारस में मोहन भागवत का विरोध, कांग्रेस का हंगामा, ACP से धक्का-मुक्की
ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, वाराणसी. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का काशी में विरोध हुआ। गुरुवार की शाम करीब 7 बजे भागवत का काफिला सिगरा चौराहे से गुजर रहा था। उससे 100 मीटर पहले भारत माता मंदिर के पास कांग्रेस के NSUI कार्यकर्ता नारेबाजी करने लगे।
सभी भागवत की तरफ दौड़े। पुलिस ने रस्सी बांधकर प्रदर्शनकारियों को रोका। कांग्रेस कार्यकर्ता मोहन भागवत को गंगा जल देने जा रहे थे। कहा- संघ प्रमुख महाकुंभ स्नान करने नहीं गए, तो यहीं गंगा स्नान कराएंगे।
इस दौरान कांग्रेस नेताओं की ACP चेतगंज गौरव कुमार समेत अन्य पुलिस कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। हंगामा बढ़ता देख चौराहे पर लगी अतिरिक्त फोर्स भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को चारों ओर से घेर लिया। करीब 9 लोगों को हिरासत में लिया गया है। सभी को सिगरा थाने ले जाया गया है।
कांग्रेस ने कहा- खुद को हिंदुत्व का सबसे बड़ा संरक्षक कहने वाले महाकुंभ से दूर रहे
संघ प्रमुख मोहन भागवत काशी के चार दिवसीय दौरे पर हैं। NSUI ने पहले से भागवत के विरोध की रणनीति तैयार की थी। कहा था कि हम सब उन्हें महाकुंभ का पवित्र जल अर्पित करेंगे। यह जल उन्हें यह स्मरण कराने के लिए अर्पित किया जाएगा कि हिंदुत्व केवल दिखावे का विषय नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा के पालन का प्रतीक है।
भागवत खुद को हिंदुत्व का सबसे बड़ा संरक्षक बताते हैं, उन्होंने प्रयागराज के महाकुंभ में सभी को हिंदुत्व के नाम पर स्नान कराया, लेकिन स्वयं महाकुंभ के पवित्र स्नान से दूर रहे।
संघ प्रमुख केवल हिंदुत्व की राजनीति करते हैं, लेकिन जब इसे जीने और निभाने की बात आती है। तब वे स्वयं पीछे हट जाते हैं। महाकुंभ का स्नान सनातन परंपरा की आत्मा है, लेकिन भागवत इससे दूर रहकर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनका हिंदुत्व केवल भाषणों और प्रचार तक सीमित है।
बौद्धिक सत्र में संघ की रीति और नीति पर चर्चा करेंगे
संघ प्रमुख केवल काशी नहीं, पूर्वांचल के कई जिलों का दौरा करेंगे। काशी में आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर मजबूती और सक्रियता पर मंथन करेंगे। कार्यकर्ताओं को देशप्रेम के साथ जन कार्यों के लिए सजग रहने का संदेश देंगे।
संघ की शाखा में योग और व्यायाम करेंगे तो बौद्धिक सत्र में संघ की रीति और नीति पर चर्चा करेंगे। युवा स्वयंसेवकों के साथ संघ की 100 वर्ष पुरानी समृद्ध विरासत पर जानकारी देंगे। इसके साथ आने वाले भविष्य में संघ की भूमिका और देश में परिवर्तन की बात रखेंगे। उनके बौद्धिक के विषय पहले से तय होंगे।
संघ प्रमुख प्रवास के दौरान एक स्कूल में शहर के प्रबुद्ध वर्ग से मिलने उनके साथ भोजन करने के साथ बौद्धिक संवाद करेंगे। 100 लोगों की सूची लगभग तैयार कर ली गई है। इसमें प्रोफेसर, समाज चिंतक, शोधार्थी, डॉक्टर और साहित्य से जुड़ी तमाम हस्तियों से भेंट करेंगे।
आरएसएस के मुखिया और छठवें सर संघचालक डा. मोहन भागवत 3-7 अप्रैल के बीच कई कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे और काशी से पूरे पूर्वांचल को साधेंगे। काशी में देश भर में नई संघ शाखाओं की रूप रेखा तय करेंगे।
हर गांव, हर बस्ती, घर-घर अभियान चलाएगा। संघ का साहित्य काशी के हर घर तक पहुंचेगा। इन्हीं कार्यक्रमों के बीच वह शताब्दी वर्ष की तैयारियों पर चर्चा करेंगे और अभियान को लेकर स्वयंसेवकों से संवाद करेंगे। आरएसएस प्रमुख के आगमन को लेकर पदाधिकारियों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।
आरएसएस के प्रांतीय पदाधिकारी ने बताया, आने वाली विजयादशमी पर संघ अपने 100 साल पूरे करेगा, यह संघ का 100वां वर्ष चल रहा है। शताब्दी वर्ष को लेकर संघ बेहद उत्साहित है, लेकिन इसकी सार्थकता जरूरी है। मोहन भागवत का दौरा संघ के आत्मचिंतन और मंथन का समय होगा। समाज के लिए संघ और क्या कर सकता है, इसकी रूपरेखा तैयार होगी।
संघ कार्यों को समाज की ओर से जो समर्थन मिला है, उसका आभार जताया जाएगा। इसे अक्तूबर-नवंबर से शुरू कर दिया जाएगा। लोगों का आभार भी जताएंगे और संघ का साहित्य घर-घर पहुंचाया जाएगा। शताब्दी वर्ष पर संघ गणवेश में खंड और नगर स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन होगा। युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम किए जाएंगे। इन योजनाओं पर काम चल रहा है।
मोहन भागवत अपने दौरे में काशी के अलाव मिर्जापुर, गाजीपुर, सोनभद्र भी जाएंगे। काशी प्रवास के बाद संघ प्रमुख 7 अप्रैल को लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे। 7 और 8 अप्रैल को लखनऊ में रहेंगे और फिर कानपुर जाएंगे। 30 अप्रैल को काशी में होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रम में वह पुनः हिस्सा लेने के लिए आ सकते हैं।